Kanpur Fake Degree Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर से बीते दिनों एक बड़ा स्कैंडल सामने आया था। यहां पुलिस ने चार युवकों को फर्जी डिग्रियों के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में आगे पता चला था कि यह एक गिरोह है जिसका नेटवर्क यूपी के कई और जिलों तक फैला हुआ था। एसआईटी की जांच में 103 डिग्रियां फर्जी निकली। बुधवार को फरीदाबाद और हापुड़ की दो यूनिवर्सिटीज ने अपने यहां से डिग्री जारी होने की बात से इंकार कर दिया। जिसके बाद एसआईटी ने अब दूसरे विश्वविद्यालयों से जारी डिग्रियों की जांच तेज कर दी है। अलीगढ़, फिरोजाबाद और सहारनपुर गईं टीमें अभी जांच करके वापस नहीं लौटी।
किदवई नगर पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में दबिश देकर चार युवकों को फर्जी डिग्रियों के साथ गिरफ्तार किया। यह लोग 2012 से यह काम कर रहे थे। इनके पास से 9 राज्यों की 15 यूनिवर्सिटी से जुड़ी 900 से ज्यादा डिग्री, माइग्रेशन, प्रमाण पत्र मिले थे। इसमें सीएसजेएमयू की भी 357 डिग्रियां शामिल हैं। गिरोह का मास्टर माइंड शैलेंद्र कुमार ओझा है जो पूरे नेटवर्क का संचालन करता है। उसके साथ नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को पुलिस ने जेल भेजा था। गैंग से जुड़े छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे की तलाश एसआईटी और सर्विलांस टीम कर रही है।
एसआईटी की पांच टीमें मंगलवार को फरीदाबाद की लिंग्या, हापुड़ की मोनाड, अलीगढ़ की मंगलायतन, सहारनपुर की ग्लोकल और फिरोजाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी में जांच करने पहुंची थी। अधिकारियों के मुताबिक लिंग्या और मोनाड यूनिवर्सिटी की जो डिग्रियां बरामद की गईं थीं वह यूनिवर्सिटी प्रबंधन से जांच कराई गई। दोनों यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने डिग्रियां अपने यहां की होने से स्पष्ट इंकार कर दिया। लिंग्या की 100 और मोनाड की 3 डिग्रियां बरामद की गई थीं। यह रिपोर्ट आने के बाद अब क्राइम ब्रांच मानकर चल रही है कि दूसरी निजी यूनिवर्सिटीज से जारी डिग्रियां भी फर्जी निकलेंगी। बहरहाल अलीगढ़, फिरोजाबाद और सहारनपुर गईं टीमें अभी जांच कर वापस नहीं लौटीं हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय ने बताया कि CSJMU से 357 डिग्रियों का डाटा और कार्यरत बाबुओं की संख्या की जानकारी मांगी गई थी। हालांकि यह जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। उधर, यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि उन्हें बरामद डिग्रियां मिल जाएं तो वह पूरा डाटा निकालकर दे दें।
एसआईटी ने शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के नाम पर खोले गए खाते की वर्ष 2021 से 2025 के बीच पांच साल की डिटेल निकाली तो करीब सात करोड़ का ट्रांजेक्शन मिला। शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के नाम से खुले खाते का संचालन शैलेंद्र कुमार ओझा करता है। एसआईटी अब यह पता लगा रही है कि खाते से कहां-कहां और कितनी धनराशि भेजी गई।
अपराध एवं मुख्यालय के संयुक्त पुलिस आयुक्त संकल्प शर्मा ने बताया कि, 'लिंग्या और मोनाड यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने लिखकर दिया है कि उनके यहां से डिग्री जारी नहीं की गई है। तीन और यूनिवर्सिटी से गुरुवार को रिपोर्ट आ जाएगी। शैलेंद्र की फर्म के खाते की जांच कराई गई। पांच साल में करीब 7 करोड़ का ट्रांजेक्शन मिला है। जांच चल रही है।'
(कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
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